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RTI अधिनियम, 2005 — हिंदी व्याख्या

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (22 of 2005) प्रत्येक भारतीय नागरिक को सार्वजनिक प्राधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। यह मुख्य धाराओं की सरल हिंदी व्याख्या है। पूर्ण अंग्रेज़ी पाठ के लिए /act देखें।

प्रमुख धाराएँ

§3 — सूचना का अधिकार

भारत के सभी नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकारी से जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।

§4(1)(b) — स्व-प्रकटीकरण (17 श्रेणियाँ)

प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकारी को अपनी वेबसाइट पर 17 श्रेणियों की जानकारी बिना RTI आवेदन के स्वयं प्रकाशित करनी है — संगठन का विवरण, बजट, अधिकारी निर्देशिका, PIO विवरण, कल्याण योजनाओं के लाभार्थी आदि।

§6 — आवेदन

§7 — निपटान समय-सीमा

§8 — छूट (10 आधार)

§8(2) — सार्वजनिक हित override

यदि सार्वजनिक हित §8(1) की हानि से अधिक है, तो PIO सूचना प्रकट कर सकता है। DPDP 2025 के बाद यह एकमात्र override है।

§9 — कॉपीराइट

तीसरे पक्ष के कॉपीराइट पर आधारित इनकार। राज्य के कॉपीराइट पर यह लागू नहीं।

§10 — Severability

यदि रिकॉर्ड का एक भाग छूट-प्राप्त है, तो शेष भाग को प्रकट करना होगा, तर्क-पूर्ण आदेश के साथ।

§11 — तीसरा पक्ष प्रक्रिया

यदि रिकॉर्ड तीसरे पक्ष से है — 5 दिन में नोटिस, 10 दिन आपत्ति, 40 दिन कुल निर्णय समय।

§18 — CIC की जांच शक्ति

Information Commission कोई भी शिकायत की जांच कर सकता है।

§19 — अपील

§20 — जुर्माना

PIO पर 250 रुपये प्रति दिन (अधिकतम 25,000 रुपये) — बिना उचित कारण इनकार पर।

§22 — Overriding Effect

RTI अधिनियम Official Secrets Act, 1923 और किसी भी असंगत कानून पर प्रभावी।

§24 — छूट-प्राप्त संगठन

Second Schedule में सूचीबद्ध खुफिया / सुरक्षा संगठन (CBI, IB, R&AW, NTRO आदि)। भ्रष्टाचार / मानवाधिकार आरोप पर proviso।

2019 और 2025 संशोधन

AI Assistant से पूछें

RTI Assistant में अपना हिंदी/अंग्रेज़ी सवाल डालें; संबंधित धारा और केस-लॉ के साथ जवाब।

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अंतिम समीक्षा: 22 अप्रैल 2026.